भारत का लोकतंत्र: रूस-चीन की अधिनायकवादी सत्ता के लिए चुनौती, और अमेरिका की लोकतांत्रिक छवि के लिए असहजता?
भारत विश्व का सबसे बड़ा और सबसे जीवंत लोकतंत्र है। निरंतर चुनाव, सत्ता परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया, स्वतंत्र न्यायपालिका और बहुदलीय व्यवस्था इसके महत्वपूर्ण अंग हैं। वहीं, जब दुनिया के दो प्रमुख खेमे – एक ओर अधिनायकवादी (जैसे चीन और रूस) और दूसरी ओर उदार लोकतंत्रवादी (जैसे अमेरिका और यूरोप) – में बंटी है, तब भारत इन दोनों से अलग एक वैकल्पिक लोकतांत्रिक मॉडल के रूप में उभर रहा है। यह स्थिति जहां चीन-रूस के केंद्रीकृत और कठोर शासन के लिए चुनौती है, वहीं अमेरिका के "लोकतंत्र के वैश्विक निर्यातक" होने के दावे के लिए असहजता का कारण बनती है। --- 1. भारत बनाम अधिनायकवाद – रूस-चीन की सत्ता के लिए चुनौती 🔸 रूस-चीन का मॉडल: रूस में व्लादिमीर पुतिन का लगभग आजीवन शासन। चीन में शी जिनपिंग का केंद्रीकृत शासन, जहां कोई चुनावी प्रतिस्पर्धा नहीं। मीडिया पर पूर्ण नियंत्रण और असहमति का दमन। 🔸 भारत का लोकतंत्र: 97 करोड़ से अधिक मतदाताओं द्वारा चुनी हुई सरकार। स्वतंत्र प्रेस, न्यायपालिका और विपक्ष। जनसंख्या और विविधता के बावजूद स्थायित्व। 🔸 चीन और रूस के लिए भारत क्यों चुनौती? भारत का लोकत...