🪷 भारत एशियाई साकार का केंद्र विंदु और पश्चिम की एशियाई चुनौती
🪷 भारत: एशियाई विकास का स्थिर केंद्र, और उसके चारों ओर रणनीतिक परिधि 🧭 प्रस्तावना: भारत केंद्र क्यों? भारत केवल भौगोलिक दृष्टि से नहीं, बल्कि आर्थिक, वैचारिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संदर्भों में एशिया के "स्थिर केंद्र" की तरह उभर रहा है। जनसंख्या, तकनीक, लोकतंत्र, नवाचार, कूटनीति और समावेशी विकास — ये सब उसे एशियाई पुनरुत्थान की धुरी बनाते हैं। चीन की आक्रामकता, पाकिस्तान की अस्थिरता, ईरान की वैचारिकता और बांग्लादेश-श्रीलंका की भूराजनीतिक द्वंद्व — ये सब भारत को केंद्र बनाते हैं जिससे स्थिरता की ऊर्जा बाहर की ओर प्रवाहित हो। 🌀 1. भारत: केंद्र की शक्ति और दायित्व पहलू विवरण राजनीतिक विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र — संस्थाओं की स्थायित्व आर्थिक 3.7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था, ग्लोबल साउथ का नेतृत्वकर्ता कूटनीतिक G20, BRICS, SCO, QUAD जैसे मंचों में निर्णायक भूमिका सांस्कृतिक योग, आयुर्वेद, बौद्ध-हिंदू धरोहर की वैश्विक स्वीकृति रणनीतिक न्यूक्लियर पावर, ISRO, Digital India, आत्मनिर्भर भारत 📌 भारत की सफलता न केवल अपने लिए है, बल्कि उसके चारों ओर स्थित परिधीय र...