सूफ़ीवाद: ईरान और भारत की साझा विरासत Sufism: A Shared Heritage of Iran and India
सूफ़ीवाद केवल एक धार्मिक धारा नहीं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना है जिसने ईरान और भारत दोनों की आत्मा को गहराई से छुआ है। यह परंपरा प्रेम, सहिष्णुता, और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना से ओतप्रोत है। ईरान इसकी जन्मभूमि रहा है, जबकि भारत ने इसे एक समावेशी सांस्कृतिक माहौल प्रदान किया। 🕌 ईरान में सूफ़ीवाद का उदय ईरान, विशेषकर इस्लामी युग में, सूफ़ी चिंतन का प्रमुख केंद्र रहा है। फ़ारसी सूफ़ी कवियों जैसे: रूमी (जलालुद्दीन रूमी) हाफ़िज़ , सादी , अत्तार , इन सबने इश्क़े-हकीकी (ईश्वर से सच्चा प्रेम) को आत्मानुभूति के साधन के रूप में प्रस्तुत किया। ईरान के सूफ़ी सिलसिले जैसे: नक़्शबंदी , क़ादिरी , और मौलवीया ने सामाजिक व आध्यात्मिक सुधारों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। 🛕 भारत में सूफ़ी प्रभाव का विस्तार सूफ़ी संत 11वीं शताब्दी में भारत पहुँचे। इन्होंने भाषाओं, जातियों और धर्मों की सीमाओं को लांघते हुए आध्यात्मिकता का संदेश दिया। प्रसिद्ध भारतीय सूफ़ी संत: ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती (अजमेर) निज़ामुद्दीन औलिया (दिल्ली) शेख़ सलीम चिश्ती (फतेहपुर सी...