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दोआब के रूप में भारत की विदेश नीति: रूस और अमेरिका के बीच संतुलन

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दोआब के रूप में भारत की विदेश नीति: रूस और अमेरिका के बीच संतुलन दोआब के रूप में भारत की विदेश नीति: रूस और अमेरिका के बीच संतुलन प्रस्तावना भारत आज एक ऐसी भू-राजनीतिक स्थिति में है जहाँ उसे विश्व की दो बड़ी शक्तियों — अमेरिका और रूस — के बीच संतुलन बनाए रखना पड़ रहा है। इस स्थिति को प्रतीकात्मक रूप से “दोआब” कहा जा सकता है — जैसे गंगा और यमुना के बीच की भूमि, जो उपजाऊ तो होती है, लेकिन दोनों धाराओं की दिशा बदलने पर सबसे पहले प्रभावित भी होती है। भारत की विदेश नीति इसी प्रकार दो महाशक्तियों के बीच स्थित है — एक ओर अमेरिका की नव-पूंजीवादी धारा, और दूसरी ओर रूस की पारंपरिक सामरिक मित्रता। “दोआब” का प्रतीक और उसका कूटनीतिक अर्थ भौगोलिक रूप में दोआब: दो नदियों के बीच की ज़मीन होती है, जो दोनों के योगदान से समृद्ध होती है। राजनीतिक रूप में: भारत आज अमेरिका और रूस — दोनों के साथ गहरे संबंध रखता है। यह स्थिति भारत को लाभ भी देती है, परंतु जोखिम भी उ...

ऑपरेशन सिन्दूर 2025

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ऑपरेशन सिन्दूर 2025: भारत का वैश्विक और क्षेत्रीय प्रभाव ऑपरेशन सिन्दूर 2025: भारत का वैश्विक और क्षेत्रीय प्रभाव Post Operation Sindoor: Global and Regional Impact of India in 2025 भूमिका 2025 में काल्पनिक ऑपरेशन 'ऑपरेशन सिन्दूर' भारत की रक्षा और विदेश नीतियों के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ बन गया। इस अभियान ने भारत की सैन्य क्षमता, रणनीतिक इच्छाशक्ति और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी साख को पुनः परिभाषित किया। ऑपरेशन सिन्दूर: पृष्ठभूमि और उद्देश्य 1. पृष्ठभूमि ऑपरेशन की आवश्यकता तब उत्पन्न हुई जब सीमा पर बढ़ती घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल दिया। 2. उद्देश्य आतंकवादी ठिकानों को निष्क्रिय करना सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाल करना भारत की सुरक्षा नीति में निर्णायकता लाना अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सक्रियता को सुदृढ़ करना 3. अभियान की संरचना सेना, वायुसेना और खुफिया एजेंसियों के संयुक्त समन्वय से इस अभियान को अंजाम दिया गया। ...

भारत और चीन के एक साथ आने का भारत पर प्रभाव

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भारत और चीन के एक साथ आने का भारत पर प्रभाव पश्चिमी दुनिया एशिया मेन एक नए महा युद्ध की जमीन तलाश रही है | भारत और चीन को आपस मेन उलझाने की कोशिश मेन है | आज एक ब्रिटीश एक्सपर्ट का बयान देखकर आश्चर्य नेहीन हुआ कि भारत को पाकिस्तान को छोड चीन पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए | पर क्यों ? पश्चिमी आर्थिक सामरिक वर्चस्व को चुनौती देने वाली दो एशियाई टकटो को कमजोर कर अमेरिका-यूरोप का सदाबहार बरचसव स्थापित करना इसका एक मात्र कारण है | एशिया का विकास रोकने के लिए ही अमेरिका एशिया की आतंकवादी शक्तियों का पोषक और एशियाई भूमि की अशांति का हेतु रहा है | यदि ये दोनों शक्तियाँ इन संभावनाओं और यूरोपीय दुर्भावनाओं को धता बताते हुए साथ आजाएँ तो क्या हो सकता है ? इसकी एक झलक यहाँ प्रस्तुत है | भारत और चीन के एक साथ आने का भारत पर प्रभाव 21वीं सदी को एशिया की सदी कहा जा रहा है, और इसमें दो मुख्य देश — भारत और चीन — वैश्विक स्तर पर निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। यदि ये दोनों देश सहयोग के पथ पर आते हैं, तो यह भारत के लिए कई मायनों में लाभदायक, तो कई मायनों में चुनौतीपूर्ण भी हो...

भारत और इंडोनेशिया

 भारत और इंडोनेशिया के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन दोनों देशों के बीच घनिष्ठता प्राचीन समय से रही है, जब भारत से हिंदू और बौद्ध धर्म इंडोनेशिया पहुंचे। यहां उनके संबंधों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है: 1. ऐतिहासिक संबंध भारत और इंडोनेशिया का संपर्क 1वीं शताब्दी ईसा पूर्व में व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से हुआ। हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, और भारतीय संस्कृति ने इंडोनेशिया की सभ्यता, कला और स्थापत्य को गहराई से प्रभावित किया। इंडोनेशिया में प्रसिद्ध बोरोबुदुर स्तूप और प्रंबनन मंदिर जैसे स्थल भारतीय प्रभाव के प्रमाण हैं। 2. राजनीतिक संबंध दोनों देश स्वतंत्रता संग्राम में एक-दूसरे के समर्थन में रहे। 1945 में इंडोनेशिया की स्वतंत्रता और 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, दोनों ने औपचारिक रूप से कूटनीतिक संबंध स्थापित किए। भारत और इंडोनेशिया गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के संस्थापक सदस्य हैं और समान विचारधारा साझा करते हैं। 3. आर्थिक संबंध भारत और इंडोनेशिया के बीच आर्थिक संबंध मजबूत हैं। इंडोनेशिया भारत का एक प्रमुख व्या...