दोआब के रूप में भारत की विदेश नीति: रूस और अमेरिका के बीच संतुलन
दोआब के रूप में भारत की विदेश नीति: रूस और अमेरिका के बीच संतुलन दोआब के रूप में भारत की विदेश नीति: रूस और अमेरिका के बीच संतुलन प्रस्तावना भारत आज एक ऐसी भू-राजनीतिक स्थिति में है जहाँ उसे विश्व की दो बड़ी शक्तियों — अमेरिका और रूस — के बीच संतुलन बनाए रखना पड़ रहा है। इस स्थिति को प्रतीकात्मक रूप से “दोआब” कहा जा सकता है — जैसे गंगा और यमुना के बीच की भूमि, जो उपजाऊ तो होती है, लेकिन दोनों धाराओं की दिशा बदलने पर सबसे पहले प्रभावित भी होती है। भारत की विदेश नीति इसी प्रकार दो महाशक्तियों के बीच स्थित है — एक ओर अमेरिका की नव-पूंजीवादी धारा, और दूसरी ओर रूस की पारंपरिक सामरिक मित्रता। “दोआब” का प्रतीक और उसका कूटनीतिक अर्थ भौगोलिक रूप में दोआब: दो नदियों के बीच की ज़मीन होती है, जो दोनों के योगदान से समृद्ध होती है। राजनीतिक रूप में: भारत आज अमेरिका और रूस — दोनों के साथ गहरे संबंध रखता है। यह स्थिति भारत को लाभ भी देती है, परंतु जोखिम भी उ...