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भारत EU और अमेरिका चीन समझौतों का प्रभाव

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अमेरिका-चीन व्यापार समझौता और भारत-EU FTA: वैश्विक अर्थव्यवस्था की नई दिशा अमेरिका-चीन व्यापार समझौता और भारत-EU FTA: वैश्विक अर्थव्यवस्था की नई दिशा प्रकाशित: 11 जून 2025 | लेखक: Your Name 1. अमेरिका-चीन व्यापार समझौता: एक नई शुरुआत भूमिका अमेरिका और चीन, विश्व की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं, वर्षों से व्यापारिक तनावों का सामना कर रहे हैं। 2025 में लंदन में हस्ताक्षरित Rare Earth Minerals Framework Deal ने वैश्विक व्यापार में नई उम्मीदें जगाई हैं। यह समझौता आपूर्ति शृंखला, तकनीकी सहयोग और रणनीतिक स्थिरता को मजबूत करने वाला है। समझौते की प्रमुख बातें रेयर अर्थ खनिजों पर सहयोग : चीन ने अमेरिका को पारदर्शी और स्थिर आपूर्ति का आश्वासन दिया। टैरिफ में कमी : कई उत्पादों पर आयात शुल्क ...

भारत और अमेरिका के संबंध

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  भारत और अमेरिका के संबंध हाल के वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद, कुछ मुद्दों पर मतभेद या "तल्ख़ी" उभर सकती है। यह तल्खी कई कारकों के कारण होती है, जिनमें रणनीतिक, आर्थिक, और राजनीतिक मुद्दे शामिल हैं। आइए इन कारणों पर विस्तार से चर्चा करते हैं: 1. भू-राजनीतिक मतभेद (a) रूस के साथ भारत के संबंध रूस-यूक्रेन युद्ध : अमेरिका ने रूस के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है और रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। भारत ने रूस के साथ व्यापार और ऊर्जा खरीद जारी रखी, जिससे अमेरिका ने असंतोष जताया। रूस से हथियारों की खरीद : भारत की रक्षा प्रणाली का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 60-70%) रूसी हथियारों पर निर्भर है। अमेरिका ने भारत को रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने पर आपत्ति जताई, लेकिन भारत ने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता बताया। (b) चीन के प्रति अलग रुख अमेरिका चीन को एक प्रत्यक्ष खतरे के रूप में देखता है और उसे रोकने के लिए आक्रामक रणनीति अपनाता है। भारत भी चीन से सतर्क है, लेकिन उसकी नीति तुलनात्मक रूप से संतुलित और रणनीतिक है, जिसमें चीन के साथ वार्ता और सहयोग के लिए जगह छोड़ी जाती ...