बदलता भारत और बेचैन होते शत्रु
भारत में नक्सल टेरर और अपराध की मंद होती धमक: चीन, अमेरिका, पाकिस्तान और वामपंथी–कांग्रेसी बेचैनी की शृंखला भारत आज जिस मुकाम पर खड़ा है, वह बीस वर्ष पहले की स्थिति से बिल्कुल अलग है। कभी जिस देश को नक्सल आतंक, उग्रवाद, जातीय विद्रोह और सीमापार से प्रायोजित आतंकवाद ने जकड़ रखा था, वहीं आज वही भारत तेज़ी से विकास और सुरक्षा के नए अध्याय लिख रहा है। लेकिन यही परिवर्तन भारत के विरोधियों के लिए चिंता का कारण है। चीन, अमेरिका और पाकिस्तान जैसे बाहरी ताक़तें हों या वामपंथी और कांग्रेसी राजनीति के वे हिस्से जिनका अस्तित्व असंतोष और आंदोलन पर टिका रहा—सभी भारत के बदलते सुरक्षा परिदृश्य से विचलित दिखते हैं। --- 1. नक्सलवाद की कमर टूटना: एक ऐतिहासिक मोड़ 2000 के दशक में नक्सलवाद भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता था। छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार और आंध्र प्रदेश का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में था। लेकिन 2014 के बाद केंद्र और राज्यों की संयुक्त रणनीति ने नक्सली गतिविधियों को जड़ों से कमजोर किया। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार योजनाओं ने जनसमर्थन छीन लिया, जबकि सुरक्षा बलों ...