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दशरथ मांझी : "माउंटेन मैन"

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  दशरथ मांझी, जिन्हें "माउंटेन मैन" के नाम से जाना जाता है, एक ऐसे अद्वितीय व्यक्ति थे जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और संघर्ष के बल पर पहाड़ को तोड़कर रास्ता बना दिया। उनके जीवन का हर पहलू प्रेरणादायक है, और उनकी जयंती पर हमें उनके संघर्ष और समर्पण को याद करना चाहिए। दशरथ मांझी का जन्म बिहार राज्य के गया जिले में हुआ था। वे गरीब थे, लेकिन उनका दिल विशाल था। उनकी पत्नी की मौत एक पहाड़ी रास्ते के कारण अस्पताल न पहुँच पाने की वजह से हो गई थी, और इसी घटना ने दशरथ मांझी को यह प्रण लेने के लिए प्रेरित किया कि वे पहाड़ को काटकर रास्ता बनाएंगे। उन्होंने अकेले ही 22 वर्षों तक इस काम को किया और अंततः एक पहाड़ को काटकर रास्ता बना दिया, जिससे पूरे गांव को फायदा हुआ और अस्पताल तक पहुंचने का रास्ता आसान हो गया। उनकी जयंती पर हमें यह समझना चाहिए कि सफलता किसी भी बाहरी परिस्थिति या संसाधनों पर निर्भर नहीं होती, बल्कि यह हमारी मेहनत, इच्छाशक्ति और समर्पण पर निर्भर करती है। दशरथ मांझी ने यह साबित किया कि अगर मन में मजबूत संकल्प हो, तो कोई भी मुश्किल हमें हमारे लक्ष्य से दूर नहीं कर सकती। उनक...

ट्रम्प का आगाज़: एक सनकी तानाशाह की झलक

 डोनाल्ड ट्रम्प का अमेरिका की राजनीति में उदय और उनके राष्ट्रपति कार्यकाल की शुरुआत इतिहास में एक अनोखी घटना मानी जाएगी। 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उनकी अप्रत्याशित जीत ने न केवल अमेरिकी समाज बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया। उनके समर्थकों ने उन्हें एक साहसी और निर्णायक नेता के रूप में देखा, जबकि आलोचकों ने उनकी कार्यशैली को "सनकी तानाशाह" की तरह माना। यह लेख ट्रम्प के नेतृत्व के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करेगा—उनकी नीतियों, नेतृत्व शैली, और वैश्विक राजनीति पर उनके प्रभाव का जायजा लेते हुए यह समझने की कोशिश करेगा कि क्यों उन्हें एक "सनकी तानाशाह" कहा जाता है। 1. नेतृत्व शैली: परंपराओं का उल्लंघन डोनाल्ड ट्रम्प का नेतृत्व पारंपरिक राजनीतिक परंपराओं से बहुत अलग था। उन्होंने अपनी छवि एक आउटसाइडर के रूप में बनाई, जो वाशिंगटन के स्थापित तंत्र और नौकरशाही को चुनौती देने आया था। लेकिन उनकी इस शैली में कई समस्याएं थीं: (i) निर्णय लेने की प्रक्रिया ट्रम्प अक्सर विशेषज्ञों और संस्थानों की सलाह को नजरअंदाज कर सीधे फैसले लेते थे। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने पेरिस जलवाय...

भारत-अमेरिका की बढ़ती दूरी और भारतीय शेयर बाजार पर प्रभाव

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 भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती राजनीतिक और आर्थिक दूरियों का असर केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है; यह भारतीय शेयर बाजार पर भी गहराई से प्रभाव डाल रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिका की केंद्रीय भूमिका और भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के बीच यह तनाव वित्तीय बाजारों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। 1. भारत-अमेरिका दूरी के प्रमुख कारक (क) रूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका ने भारत के रूस से तेल आयात करने और यूक्रेन पर तटस्थ रुख अपनाने की आलोचना की है। इस स्थिति ने दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को बढ़ाया है। (ख) व्यापारिक असंतुलन और संरक्षणवाद अमेरिका ने भारत के आयात-निर्या त नीतियों को लेकर आपत्ति जताई है। H-1B वीजा प्रतिबंधों और ई-कॉमर्स कंपनियों पर नियामकीय बाधाओं ने भारतीय आईटी और स्टार्टअप सेक्टर पर असर डाला है। (ग) वैश्विक निवेश प्रवाह पर प्रभाव अमेरिका द्वारा फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें बढ़ाने से भारतीय बाजारों से विदेशी पूंजी का बहिर्गमन बढ़ा है। 2. भारतीय शेयर बाजार पर प्रभाव (क) एफपीआई (FPI) की निकासी अमेरिकी नीतियों और भारत-अमेरिका संबंधों में त...

भारत-अमेरिका के बीच बढ़ती दूरी: गहराई से विश्लेषण

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भारत और अमेरिका के संबंध लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय रहे हैं। इन दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच संबंधों ने कई मोड़ लिए हैं, लेकिन हाल के समय में इन रिश्तों में खटास के संकेत मिल रहे हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में बदलाव, व्यापारिक विवाद, और कूटनीतिक प्राथमिकताओं के चलते भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती दूरी एक गंभीर चुनौती बन गई है। यह संपादकीय इस मुद्दे को गहराई से समझने और समाधान की दिशा में प्रकाश डालने का प्रयास करेगा। 1. भारत-अमेरिका संबंधों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से बदलते रहे हैं। शीत युद्ध काल: शीत युद्ध के दौरान भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व किया, जबकि अमेरिका ने पश्चिमी गुट का समर्थन किया। भारत का झुकाव सोवियत संघ की ओर था, जिससे दोनों देशों के बीच दूरी बनी रही। 1990 के दशक: सोवियत संघ के पतन के बाद, भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को उदार बनाया और अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए। 21वीं सदी: 2005 के ऐतिहासिक भारत-अमेरिका परमाणु समझौते ने इन संबंधों...