Strategy on China and the Risk of Turning India into the Next Ukraine

 चीन पर अमेरिकी रिपोर्ट और भारत का ‘यूक्रेन-करण’

US Strategy on China and the Risk of Turning India into the Next Ukraine

भूमिका | Introduction

चीन पर हाल ही में जारी अमेरिकी रणनीतिक रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान का एक साथ उल्लेख कोई साधारण कूटनीतिक विवरण नहीं है। यह एक गंभीर संकेत है—ऐसा संकेत, जिसे यदि भारत ने समय रहते नहीं समझा, तो वह स्वयं को एक ऐसे युद्धक्षेत्र में खड़ा पाएगा जहाँ लड़ाई उसकी होगी, विनाश उसका होगा, लेकिन लाभ और शांति की शर्तें कोई और तय करेगा।

यूक्रेन इसका जीवित उदाहरण है।

और भारत के संदर्भ में यह आशंका अब केवल कल्पना नहीं, बल्कि रणनीतिक संभावना बनती जा रही है।

1. रिपोर्ट की भाषा: समर्थन या साजिश?

Strategic Language: Support or Subtle Trap?

अमेरिकी रिपोर्ट कहती है—

चीन विस्तारवादी है

भारत लोकतांत्रिक संतुलनकारी शक्ति है

पाकिस्तान चीनी प्रभाव का माध्यम है

सतह पर यह भारत-समर्थक प्रतीत होता है, लेकिन रणनीतिक पाठ कुछ और कहता है:

भारत को Frontline State घोषित करना

चीन के विरुद्ध संभावित संघर्ष में भारत को पहला मोहरा बनाना

पाकिस्तान को permanent irritant की तरह जीवित रखना

यही मॉडल अमेरिका ने शीतयुद्ध से लेकर आज तक अपनाया है—

कोरिया, वियतनाम, अफगानिस्तान, इराक और अब यूक्रेन।

2. ‘नया यूक्रेन’ बनने का अर्थ क्या है?

What Does “New Ukraine” Mean for India?

यूक्रेन को लेकर अमेरिका की रणनीति अब निर्विवाद है:

रूस को उकसाया गया

हथियार दिए गए, लेकिन प्रत्यक्ष युद्ध से दूरी रखी गई

युद्ध को लंबा खींचा गया

अंततः यूक्रेन को आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भौगोलिक क्षति झेलनी पड़ी

भारत के संदर्भ में यही ढांचा इस प्रकार बन सकता है:

यूक्रेन

भारत

रूस बनाम NATO

चीन बनाम QUAD

सैन्य सहायता

तकनीकी + खुफिया सहयोग

पश्चिमी भाषण

लोकतंत्र का नैरेटिव

अंततः अकेलापन

रणनीतिक孤立

भारत यदि भावनाओं में बहा, तो वह लड़ेगा भी और हारेगा भी—दोनों अकेले।

3. पाकिस्तान का ज़िक्र: असली रणनीतिक संकेत

Why Pakistan Is Deliberately Kept in the Picture

यदि अमेरिकी रिपोर्ट केवल चीन पर केंद्रित होती, तो भारत को राहत मिलती।

लेकिन भारत के साथ पाकिस्तान को जोड़ना बताता है कि—

अमेरिका नहीं चाहता कि भारत कभी एकल-मोर्चे की स्थिति में आए

पाकिस्तान को पूरी तरह खत्म नहीं, बल्कि manageable threat बनाए रखना है

ताकि भारत की ऊर्जा, संसाधन और ध्यान बंटा रहे

यह वही नीति है जिसे अमेरिका ने मध्य-पूर्व में

“Controlled Chaos” के नाम पर लागू किया।

4. संरक्षण के नाम पर उकसावे की राजनीति

Provocation in the Name of Protection

अमेरिकी रणनीति का क्रम लगभग हर जगह एक-सा रहा है:

पहले सुरक्षा का आश्वासन

फिर खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना

फिर स्थानीय शक्ति को टकराव की ओर धकेलना

अंत में अपनी शर्तों पर समझौता थोपना

भारत के लिए इसका परिणाम हो सकता है:

हथियारों की अंतहीन खरीद

विदेश नीति में सीमित स्वतंत्रता

रूस, ईरान और ग्लोबल साउथ से दूरी

और अंततः रणनीतिक अधीनता

5. भारत के लिए वास्तविक खतरा क्या है?

The Real Threat Is Not China or Pakistan

चीन और पाकिस्तान भारत के लिए चुनौती हैं—

लेकिन सबसे बड़ा खतरा यह है कि भारत स्वयं मोहरा बन जाए।

यदि भारत—

पश्चिमी नैरेटिव को अपना विवेक बना ले

‘लोकतंत्र बनाम तानाशाही’ के जाल में फँस जाए

या भावनात्मक राष्ट्रवाद में रणनीति भूल जाए

तो वह वही भूल दोहराएगा जो यूक्रेन ने की।

6. भारत के पास क्या विकल्प हैं?

India’s Strategic Alternatives

भारत को चाहिए:

अमेरिका से साझेदारी, लेकिन रणनीतिक दूरी

चीन से टकराव नहीं, संतुलन

पाकिस्तान को युद्ध नहीं, अप्रासंगिकता

ग्लोबल साउथ, BRICS और बहुध्रुवीय विश्व में सक्रिय भूमिका

यही वह नीति है जिसे भारतीय परंपरा कहती है—

“कर बहियां बल अपने”

निष्कर्ष | Conclusion

चीन पर अमेरिकी रिपोर्ट में भारत-पाकिस्तान का संयुक्त उल्लेख

कोई संयोग नहीं है।

यह एक स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका भारत को

स्वतंत्र महाशक्ति नहीं, बल्कि नियंत्रित अग्रिम चौकी के रूप में देखना चाहता है।

यदि भारत समय रहते नहीं समझा,

तो वह युद्ध लड़ेगा—

लेकिन शांति की शर्तें कोई और तय करेगा।

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