दक्षिण अफ्रीका का ‘Expropriation Act 2024–25
एक जटिल प्रश्न पर वैश्विक बहसदक्षिण अफ्रीका की संसद में 24 जनवरी 2025 को गजट में प्रकाशित Expropriation Act 13 of 2024 ने वैश्विक पटल पर एक तूफान खड़ा कर दिया है। यह कानून, जो अपार्टहाइड-युग के पुराने Expropriation Act 1975 को रद्द करता है, सरकार को “सार्वजनिक हित” (public interest) के नाम पर निजी संपत्ति, खासकर भूमि, का अधिग्रहण करने की शक्ति देता है—और कुछ विशेष परिस्थितियों में बिना बाजार मूल्य के मुआवजे (nil compensation) के। राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने इसे संवैधानिक धारा 25(3) के अनुरूप बताते हुए हस्ताक्षर किया, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “श्वेत किसानों के खिलाफ नस्लीय भेदभाव” करार देते हुए 7 फरवरी 2025 को कार्यकारी आदेश जारी कर दक्षिण अफ्रीका को अमेरिकी सहायता रोक दी। एलन मस्क जैसे दक्षिण अफ्रीका-जन्मे अरबपतियों ने इसे “श्वेत नरसंहार” (white genocide) का द्वार खोलने वाला बताया, जबकि ANC सरकार इसे ऐतिहासिक अन्याय सुधार का साधन मानती है।यह बहस सिर्फ भूमि पर नहीं, बल्कि नस्ल, इतिहास, अर्थव्यवस्था और वैश्विक शक्ति संतुलन पर केंद्रित है। 1913 के Natives Land Act से शुरू हुई यह यात्रा आज भी दक्षिण अफ्रीका को दो भागों में बांटती है: एक तरफ काले बहुसंख्यक की असमानता की पीड़ा, दूसरी तरफ श्वेत अल्पसंख्यक की संपत्ति सुरक्षा की चिंता। क्या यह कानून न्याय की दिशा में कदम है या नस्लीय प्रतिशोध का बीज? आइए, तथ्यों, इतिहास और प्रतिक्रियाओं के आईने में देखें।भूमि का इतिहास: दक्षिण अफ्रीका की राजनीति का मूल घावदक्षिण अफ्रीका की भूमि नीति का इतिहास उपनिवेशवाद और अपार्टहाइड की क्रूर विरासत है। 1913 का Natives Land Act काले दक्षिण अफ्रीकियों को मात्र 7% भूमि तक सीमित कर देता था, जबकि श्वेत अल्पसंख्यक (लगभग 9% आबादी) को 87% कृषि योग्य भूमि मिली। अपार्टहाइड काल (1948-1994) में यह और कठोर हुआ: जबरन विस्थापन, ‘होमलैंड्स’ (Bantustans) की स्थापना, ग्रुप एरियाज एक्ट के तहत शहरी क्षेत्रों से काले लोगों का निष्कासन—जैसे सोफिएटाउन, डिस्ट्रिक्ट सिक्स और केटो मैनर से लाखों का उजाड़ा जाना।1994 में नेल्सन मंडेला के नेतृत्व में लोकतंत्र आने के बाद ANC सरकार ने भूमि सुधार के तीन स्तंभ अपनाए:
- Restitution: अपार्टहाइड में विस्थापितों को भूमि या मुआवजा लौटाना (Restitution of Land Rights Act, 1994)।
- Redistribution: बाजार-आधारित हस्तांतरण के माध्यम से भूमि का पुनर्वितरण (Willing Buyer-Willing Seller मॉडल)।
- Tenure Reform: खेत मजदूरों और अनौपचारिक कब्जेदारों को सुरक्षित भूमि अधिकार।
- परित्यक्त भूमि (Abandoned land): जहां मालिक ने उपयोग छोड़ दिया हो।
- अविकसित सट्टा भूमि (Speculative unused land): जहां मुख्य उद्देश्य बाजार मूल्य वृद्धि हो, न कि विकास या आय।
- अवैध उपयोग वाली भूमि (Land held for illegal purposes): जैसे अपराध या राज्य सब्सिडी पर बनी लेकिन उपयोग न की गई।
- सार्वजनिक संसाधनों तक पहुंच (Access to natural resources): जैसे पानी या खनिज, जहां भूमि बाधा बने।
- De Facto Racial Targeting: कानून नस्ल-तटस्थ लगता है, लेकिन “disparate impact” (परिणामगत भेदभाव) पैदा करता है। श्वेत किसान, जो ऐतिहासिक रूप से लाभान्वित हुए, अब लक्षित होंगे। डेमोक्रेटिक अलायंस (DA) ने 7 फरवरी 2025 को वेस्टर्न केप हाई कोर्ट में इसे असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी।
- राजनीतिक ध्रुवीकरण: फ्रीडम फ्रंट प्लस और अफ्रीफोरम जैसे अफ्रीकानेर संगठन इसे “racialised land seizure” कहते हैं। X (पूर्व ट्विटर) पर #TheWorldMustKnow कैंपेन ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाया, जहां अफ्रीफोरम प्रतिनिधि अमेरिका, हंगरी और नीदरलैंड्स में प्रचार कर रहे हैं।
- सुरक्षा और हिंसा का प्रश्न: पिछले दशक में फार्म अटैक्स बढ़े हैं—2023 में 49 हत्याएं। लेकिन ये आर्थिक अपराध या सामान्य हिंसा से जुड़े हैं, न कि संगठित नस्लीय हमलों से। फिर भी, “Kill the Boer” जैसे नारे (जो EFF रैलियों में गूंजते हैं) चिंता बढ़ाते हैं, हालांकि अदालतें इन्हें “सांस्कृतिक अभिव्यक्ति” मानती हैं।
- अमेरिका: ट्रंप का आदेश USAID को रोकता है (440 मिलियन डॉलर सालाना, मुख्यतः HIV कार्यक्रमों के लिए)। मार्को रुबियो ने G20 समिट बॉयकॉट किया। मस्क की भूमिका स्पष्ट: उनके X पोस्ट ट्रंप को प्रभावित करते हैं।
- यूरोपीय संघ: मिश्रित—कुछ सांसद “racially motivated” कहते हैं, लेकिन EU आयोग भूमि सुधार का समर्थन करता है।
- वैश्विक दक्षिण: ब्राजील, भारत (BRICS में) और लैटिन अमेरिका इसे “colonial correction” मानते हैं। संयुक्त राष्ट्र में अफ्रीकी देशों ने समर्थन दिया।
- X पर बहस: नवीनतम पोस्ट (मई 2025) ट्रंप के बयान पर केंद्रित, जहां उपयोगकर्ता “genocide myth” को डिबंक करते हैं। अफ्रीफोरम का कैंपेन मिसइनफॉर्मेशन फैला रहा है।
- तथ्य: कानून पुनर्वितरण तेज करता है; nil compensation अपवाद है; प्रभाव श्वेत किसानों पर अधिक, लेकिन नस्ल-आधारित नहीं।
- भ्रम: “सभी श्वेत भूमि छीन ली जाएगी”; “genocide” संगठित है।
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