Communal Divisions and Conflicts in South Asia: The Role of China

 दक्षिण एशिया में सांप्रदायिक विभाजन और टकराव: चीन की भूमिका और वैश्विक राजनीति

Communal Divisions and Conflicts in South Asia: The Role of China

सांप्रदायिक विभाजन: नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता Communal Divisions Cannot Be Ignored दक्षिण एशिया आज एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल में बार-बार उभरते सांप्रदायिक संघर्ष और टकराव केवल आंतरिक समस्याएँ नहीं हैं। ये संघर्ष:

  • धर्म और पहचान पर आधारित हैं,
  • राजनीतिक और चुनावी अवसरों से प्रेरित हैं,
  • और बाहरी शक्तियों के नैरेटिव से प्रभावित होते हैं।

अल्पसंख्यक समुदाय बार-बार निशाना बनते हैं। यह केवल मानवाधिकार का प्रश्न नहीं, बल्कि समाज के आधारभूत ढांचे पर संकट है। चीन की भूमिका: रणनीतिक उकसावा या अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप? China’s Role: Strategic Provocation or Indirect Intervention? चीन दक्षिण एशिया में सीधे सैन्य या आर्थिक आक्रमण नहीं करता, लेकिन उसकी भूमिका कई परतों में दिखाई देती है:

  1. सैन्य और भू-राजनीतिक दबाव:

   * भारत और पाकिस्तान में सीमाओं पर तनाव,

   * गलवान जैसी घटनाओं के बाद मीडिया नैरेटिव पर प्रभाव।

  1. आर्थिक परियोजनाओं के माध्यम से दबाव:

   * बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI)

   * पड़ोसी देशों में अवसंरचना निवेश

   * परियोजनाओं से स्थानीय राजनीति और पहचान संघर्ष प्रभावित।

  1. नैरेटिव वॉर और डिजिटल प्रभाव:

   * सोशल मीडिया पर चीन समर्थित कंटेंट के ज़रिए अलगाव और अस्थिरता बढ़ाना,

   * दक्षिण एशियाई मीडिया में चीन की छवि और रणनीतिक हितों का समर्थन।

चीन का उद्देश्य सीधे सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि क्षेत्र में अपने प्रभाव को सुरक्षित रखना और भारत की बढ़ती भूमिका को सीमित करना है। सांप्रदायिक टकराव: चुनाव और राजनीतिक अवसर Communal Clashes: Elections and Political Opportunities

  • चुनावी समय पर विभाजनकारी हिंसा बढ़ जाती है।
  • अल्पसंख्यकों को वोट बैंक के रूप में देखा जाता है।
  • राजनीति और प्रशासन कभी-कभी निष्पक्ष नहीं रहते।

इस प्रक्रिया में चीन या अन्य वैश्विक खिलाड़ी अप्रत्यक्ष रूप से स्थायित्व और अस्थिरता के बीच संतुलन का फायदा उठाते हैं। अंतरराष्ट्रीय पहल और नैरेटिव का खेल International Initiatives and the Narrative Game

  • मानवाधिकार रिपोर्ट, NGO रिपोर्ट, और वैश्विक मीडिया के ज़रिए घटनाओं का फ्रेम तय किया जाता है।
  • अक्सर चयनात्मक ध्यान (Selective Attention) सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देता है।
  • यह पूरी प्रक्रिया दक्षिण एशियाई लोकतंत्र और सामाजिक ताने-बाने पर दबाव डालती है।

निष्कर्ष: अस्थिरता का जाल Conclusion: The Web of Instability दक्षिण एशिया में सांप्रदायिक विभाजन और टकराव केवल स्थानीय राजनीति या धार्मिक भावनाओं का परिणाम नहीं हैं।

  • यह भूराजनीतिक खेल, बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप और स्थानीय कमजोरियों का मिश्रण है।
  • चीन का रणनीतिक उद्देश्य सीधे हस्तक्षेप नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता का अवसर बनाना है।

समाज के लिए चेतावनी स्पष्ट है: असली चुनौती न केवल हिंसा को रोकने की है, बल्कि वैश्विक और स्थानीय उकसावे की जड़ तक पहुंचने की है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दशरथ मांझी : "माउंटेन मैन"

कश्मीर के रास्ते ही सुलझेगी कश्मीर समस्या

ब्रिटिश लोकतंत्र और बहुलता वाद का खोखलापन