China and US Investments in Communal Polarization
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| China in South Asia |
सांप्रदायिक ध्रुवीकरण में चीन और अमेरिका का निवेश
China and US Investments in Communal Polarization
दक्षिण एशिया में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण—धार्मिक विभाजन और टकराव—मुख्य रूप से आंतरिक कारकों से उत्पन्न होता है, जैसे चुनावी राजनीति, ऐतिहासिक विभाजन, और स्थानीय अवसरवाद।
बाहरी शक्तियां जैसे चीन और अमेरिका अप्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकती हैं, लेकिन उपलब्ध प्रमाण (Carnegie Endowment, USIP, World Bank 2020–2025) दिखाते हैं कि ये निवेश सीधे सांप्रदायिक टकराव को भड़काने के लिए नहीं हैं। उनका उद्देश्य मुख्य रूप से भूराजनीतिक और आर्थिक हित है।
चीन का निवेश: BRI के माध्यम से आर्थिक प्रभाव
China’s Investments: Economic Leverage via BRI
चीन का मुख्य निवेश बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत है, जो अवसंरचना, पोर्ट और ऊर्जा परियोजनाओं पर केंद्रित है (2025 तक अरबों डॉलर में):
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पाकिस्तान: CPEC में $60 बिलियन से अधिक; बलोचिस्तान में जातीय असंतोष बढ़ा (Carnegie, 2021; The Diplomat, 2022)
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श्रीलंका: Hambantota पोर्ट और 2025 में $3.7 बिलियन ऑयल रिफाइनरी डील (Green Finance & Development Center, 2025)
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बांग्लादेश: $4.45 बिलियन से अधिक 35 प्रोजेक्ट्स, मार्च 2025 में अतिरिक्त $2.1 बिलियन लोन (EurAsian Times, 2025)
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नेपाल: Pokhara एयरपोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स, लेकिन लागत बढ़ोतरी और ऋण चिंताएं (Borderlens, 2025)
ये निवेश क्षेत्रीय स्थिरता के लिए हैं, क्योंकि अस्थिरता चीनी हितों को नुकसान पहुँचाती है।
कुछ अप्रत्यक्ष प्रभाव दिखते हैं—जैसे बलोचिस्तान में स्थानीय जातीय तनाव, लेकिन ये धार्मिक नहीं।
अमेरिका का निवेश: सहायता और मानवाधिकार पर फोकस
US Investments: Aid and Human Rights Focus
अमेरिका का निवेश मुख्य रूप से विकास, स्वास्थ्य और मानवाधिकार पर केंद्रित है (USAID और USCIRF के माध्यम से):
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बांग्लादेश: पिछले चार वर्षों में $1.89 बिलियन, 2024 में अतिरिक्त $202 मिलियन (Times of India, 2024; New Indian Express, 2025)
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पाकिस्तान: हाल के वर्षों में कटौती, लेकिन पहले अरबों में (The Diplomat, 2025)
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भारत: $720 मिलियन (2021–2025), मुख्य रूप से स्वास्थ्य पर (New Indian Express, 2025)
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NGO फंडिंग: अल्पसंख्यक अधिकार, मीडिया और सिविल सोसाइटी के लिए, 2025 में कटौती के बावजूद जारी (Frontline, 2025)
USCIRF रिपोर्ट्स भारत को “Country of Particular Concern” मानती हैं। कुछ आलोचनाएँ इसे चयनात्मक हस्तक्षेप कहती हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से ध्रुवीकरण बढ़ा सकता है।
सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर निवेशों का प्रभाव: अप्रत्यक्ष और सीमित
Impact on Communal Polarization: Indirect and Limited
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चीन: BRI कभी-कभी स्थानीय असंतोष बढ़ाता है (जैसे भूमि अधिग्रहण से), जो जातीय तनाव ले सकता है, लेकिन धार्मिक ध्रुवीकरण से सीधा जुड़ाव कम
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अमेरिका: रिपोर्ट्स और फंडिंग अल्पसंख्यक मुद्दों को उजागर करती हैं; कुछ सरकारें इसे “बाहरी हस्तक्षेप” मानती हैं, अप्रत्यक्ष रूप से तनाव बढ़ सकता है
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दोनों की प्रतिस्पर्धा: चीन का प्रभाव बढ़ने से अमेरिकी सहायता कटौती, लेकिन कोई प्रमाण नहीं कि निवेश धार्मिक हिंसा में सीधा निवेश कर रहे हैं
आंतरिक जड़ें प्रमुख, बाहरी प्रभाव अप्रत्यक्ष
Conclusion: Internal Roots, External Influence Indirect
दक्षिण एशिया में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की जड़ें स्थानीय हैं।
चीन और अमेरिका का निवेश भूराजनीतिक और आर्थिक हितों के लिए है—चीन भारत को संतुलित करने के लिए, अमेरिका मानवाधिकार और स्थिरता के लिए।
उपलब्ध प्रमाण दिखाते हैं कि कोई देश सीधे धार्मिक विभाजन नहीं भड़काता।
समाधान:
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आंतरिक सुधार और समावेशी राजनीति
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पारदर्शी और स्थिर निवेश
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बाहरी शक्तियों के प्रभाव को समझना और नियंत्रित करना

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