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भारत और चीन के एक साथ आने का भारत पर प्रभाव

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भारत और चीन के एक साथ आने का भारत पर प्रभाव पश्चिमी दुनिया एशिया मेन एक नए महा युद्ध की जमीन तलाश रही है | भारत और चीन को आपस मेन उलझाने की कोशिश मेन है | आज एक ब्रिटीश एक्सपर्ट का बयान देखकर आश्चर्य नेहीन हुआ कि भारत को पाकिस्तान को छोड चीन पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए | पर क्यों ? पश्चिमी आर्थिक सामरिक वर्चस्व को चुनौती देने वाली दो एशियाई टकटो को कमजोर कर अमेरिका-यूरोप का सदाबहार बरचसव स्थापित करना इसका एक मात्र कारण है | एशिया का विकास रोकने के लिए ही अमेरिका एशिया की आतंकवादी शक्तियों का पोषक और एशियाई भूमि की अशांति का हेतु रहा है | यदि ये दोनों शक्तियाँ इन संभावनाओं और यूरोपीय दुर्भावनाओं को धता बताते हुए साथ आजाएँ तो क्या हो सकता है ? इसकी एक झलक यहाँ प्रस्तुत है | भारत और चीन के एक साथ आने का भारत पर प्रभाव 21वीं सदी को एशिया की सदी कहा जा रहा है, और इसमें दो मुख्य देश — भारत और चीन — वैश्विक स्तर पर निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। यदि ये दोनों देश सहयोग के पथ पर आते हैं, तो यह भारत के लिए कई मायनों में लाभदायक, तो कई मायनों में चुनौतीपूर्ण भी हो...

🌍 विश्व आतंकवाद का केंद्र: पाकिस्तान, तुर्की और वैश्विक गठबंधन की चुनौती

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विश्व आतंकवाद का घर: पाकिस्तान, तुर्की और वैश्विक गठजोड़ 🔥 भूमिका आज विश्व जिस सबसे जटिल संकट से जूझ रहा है, वह है आतंकवाद। यह सिर्फ़ एक देश या धर्म से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि एक वैश्विक नेटवर्क है — जिसका मुख्यालय कई बार पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों में दिखाई देता है। वहीं, अमेरिका और चीन जैसे महाशक्तियाँ इन देशों से अपने भू-राजनीतिक हितों के चलते समझौता करती नजर आती हैं। 🇵🇰 पाकिस्तान: आतंकवाद का पोषक? ISI और आतंकी संगठनों का गठजोड़ — जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा जैसे गुट पाकिस्तान से संचालित। भारत पर हमले: 26/11, उरी, पठानकोट, पुलवामा जैसे बड़े हमलों में भूमिका। FATF की ग्रे लिस्ट: अंतरराष्ट्रीय दबाव, लेकिन कार्यवाही संदिग्ध। 🇹🇷 तुर्की: इस्लामी नेतृत्व की आड़ में रणनीति तुर्की का कुर्द विरोध उसे आतंकवादी गुटों से छिपा समर्थन देने की दिशा में ले गया है। सीरिया के युद्ध में इसकी भूमिका विवादित रही है, और भारत विरोधी बयानों ने संबंधों को प्रभावित किया है। 🇺🇸 🇨🇳 अमेरिका और चीन की दोहरी नीति अमेरिका: आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई म...

वैश्विक आतंकवाद और भारत

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21वीं सदी में आतंकवाद एक गंभीर वैश्विक संकट बन चुका है जिसने राष्ट्रों की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक संरचना और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को बुरी तरह प्रभावित किया है। यह न केवल एक देश की समस्या है, बल्कि पूरी मानवता के लिए खतरा है। भारत, जो स्वयं दशकों से आतंकवाद का शिकार रहा है, इस वैश्विक समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस लेख में हम वैश्विक आतंकवाद की प्रवृत्तियों, प्रमुख संगठन, तकनीकी और आर्थिक पहलुओं, भारत की चुनौतियाँ और रणनीतियाँ तथा वैश्विक सहयोग का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करेंगे। 1. वैश्विक आतंकवाद की वर्तमान स्थिति 1.1 प्रमुख आतंकवादी संगठन: ISIS (इस्लामिक स्टेट): मध्य पूर्व से शुरू होकर इस्लामी कट्टरता का वैश्विक चेहरा बना। अल-कायदा: ओसामा बिन लादेन द्वारा स्थापित, जिसने 9/11 जैसे हमले किए। बोको हराम: नाइजीरिया में सक्रिय, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाता है। तालिबान: अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज होने के बाद फिर से वैश्विक चिंता का विषय। 1.2 वैश्विक प्रवृत्तियाँ: लोन वुल्फ अटैक: अकेले आतंकवादी द्वारा भीड़भाड़ वाले स्थानों पर...

अमेरिका और तुर्की जैसे शक्तिशाली राष्ट्र और विश्व आतंकवाद की चुनौती

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आतंकवाद आज विश्व के समक्ष एक सबसे बड़ा और जटिल संकट बन चुका है। यह न केवल निर्दोष लोगों के जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि वैश्विक स्थिरता, आर्थिक प्रगति और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को भी गहराई से प्रभावित करता है। अमेरिका, तुर्की और पाकिस्तान जैसे राष्ट्र इस संकट से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जूझ रहे हैं। भारत, जो स्वयं आतंकवाद का दीर्घकालीन शिकार रहा है, इस वैश्विक विमर्श का एक महत्वपूर्ण पक्ष बन चुका है। इस लेख में हम अमेरिका, तुर्की और पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी नीतियों के विश्लेषण के साथ-साथ भारत के अनुभवों और रणनीतियों को भी जोड़कर देखेंगे। 1. अमेरिका और आतंकवाद 1.1 9/11 के बाद की अमेरिकी नीति: 2001 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले ने अमेरिका को आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक और आक्रामक नीति अपनाने पर मजबूर किया। इसके पश्चात " ग्लोबल वॉर ऑन टेरर " की अवधारणा सामने आई और अमेरिका ने अफगानिस्तान और इराक में सैन्य हस्तक्षेप किया। 1.2 सैन्य और तकनीकी रणनीति: अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन स्ट्राइक, साइबर सर्विलांस, और विशेष बलों के अभियान का प्रयोग ...

दशरथ मांझी : "माउंटेन मैन"

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  दशरथ मांझी, जिन्हें "माउंटेन मैन" के नाम से जाना जाता है, एक ऐसे अद्वितीय व्यक्ति थे जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और संघर्ष के बल पर पहाड़ को तोड़कर रास्ता बना दिया। उनके जीवन का हर पहलू प्रेरणादायक है, और उनकी जयंती पर हमें उनके संघर्ष और समर्पण को याद करना चाहिए। दशरथ मांझी का जन्म बिहार राज्य के गया जिले में हुआ था। वे गरीब थे, लेकिन उनका दिल विशाल था। उनकी पत्नी की मौत एक पहाड़ी रास्ते के कारण अस्पताल न पहुँच पाने की वजह से हो गई थी, और इसी घटना ने दशरथ मांझी को यह प्रण लेने के लिए प्रेरित किया कि वे पहाड़ को काटकर रास्ता बनाएंगे। उन्होंने अकेले ही 22 वर्षों तक इस काम को किया और अंततः एक पहाड़ को काटकर रास्ता बना दिया, जिससे पूरे गांव को फायदा हुआ और अस्पताल तक पहुंचने का रास्ता आसान हो गया। उनकी जयंती पर हमें यह समझना चाहिए कि सफलता किसी भी बाहरी परिस्थिति या संसाधनों पर निर्भर नहीं होती, बल्कि यह हमारी मेहनत, इच्छाशक्ति और समर्पण पर निर्भर करती है। दशरथ मांझी ने यह साबित किया कि अगर मन में मजबूत संकल्प हो, तो कोई भी मुश्किल हमें हमारे लक्ष्य से दूर नहीं कर सकती। उनक...

ट्रम्प का आगाज़: एक सनकी तानाशाह की झलक

 डोनाल्ड ट्रम्प का अमेरिका की राजनीति में उदय और उनके राष्ट्रपति कार्यकाल की शुरुआत इतिहास में एक अनोखी घटना मानी जाएगी। 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उनकी अप्रत्याशित जीत ने न केवल अमेरिकी समाज बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया। उनके समर्थकों ने उन्हें एक साहसी और निर्णायक नेता के रूप में देखा, जबकि आलोचकों ने उनकी कार्यशैली को "सनकी तानाशाह" की तरह माना। यह लेख ट्रम्प के नेतृत्व के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करेगा—उनकी नीतियों, नेतृत्व शैली, और वैश्विक राजनीति पर उनके प्रभाव का जायजा लेते हुए यह समझने की कोशिश करेगा कि क्यों उन्हें एक "सनकी तानाशाह" कहा जाता है। 1. नेतृत्व शैली: परंपराओं का उल्लंघन डोनाल्ड ट्रम्प का नेतृत्व पारंपरिक राजनीतिक परंपराओं से बहुत अलग था। उन्होंने अपनी छवि एक आउटसाइडर के रूप में बनाई, जो वाशिंगटन के स्थापित तंत्र और नौकरशाही को चुनौती देने आया था। लेकिन उनकी इस शैली में कई समस्याएं थीं: (i) निर्णय लेने की प्रक्रिया ट्रम्प अक्सर विशेषज्ञों और संस्थानों की सलाह को नजरअंदाज कर सीधे फैसले लेते थे। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने पेरिस जलवाय...

भारत-अमेरिका की बढ़ती दूरी और भारतीय शेयर बाजार पर प्रभाव

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 भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती राजनीतिक और आर्थिक दूरियों का असर केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है; यह भारतीय शेयर बाजार पर भी गहराई से प्रभाव डाल रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिका की केंद्रीय भूमिका और भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के बीच यह तनाव वित्तीय बाजारों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। 1. भारत-अमेरिका दूरी के प्रमुख कारक (क) रूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका ने भारत के रूस से तेल आयात करने और यूक्रेन पर तटस्थ रुख अपनाने की आलोचना की है। इस स्थिति ने दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को बढ़ाया है। (ख) व्यापारिक असंतुलन और संरक्षणवाद अमेरिका ने भारत के आयात-निर्या त नीतियों को लेकर आपत्ति जताई है। H-1B वीजा प्रतिबंधों और ई-कॉमर्स कंपनियों पर नियामकीय बाधाओं ने भारतीय आईटी और स्टार्टअप सेक्टर पर असर डाला है। (ग) वैश्विक निवेश प्रवाह पर प्रभाव अमेरिका द्वारा फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें बढ़ाने से भारतीय बाजारों से विदेशी पूंजी का बहिर्गमन बढ़ा है। 2. भारतीय शेयर बाजार पर प्रभाव (क) एफपीआई (FPI) की निकासी अमेरिकी नीतियों और भारत-अमेरिका संबंधों में त...